about Magnet/चुंबक/चुंबकीय बल रेखाय/चुंबकीय फल्लस/लारेंज बल/धारावाहिक चालक पर लगने वाले वाले बल की दिशा/वायो और शावर्त का नियम/from basic/physics-76

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➤ Magnet ( चुंबक )-
 

यह एक काले रंग का पदार्थ होता है, जिसमे आकर्षण तथा प्रतिकर्षण का गुण देखा जाता है। हालांकि चुंबक की असली पहचान प्रतिकर्षण से होता है। चुंबक लोहे का अयस्क  मैगनेटिक (Fe₃O₄) होता है। 

चुंबक को दिशा सूचक या Load Stone भी कहते हैं। अस्थायी चुंबक को बनाने के लिए नर्म लोहा का प्रयोग करते है, जबकि स्थायी चुंबक के लिए स्टील ( इस्पात ) का प्रयोग करते है। 

अस्थायी चुंबक में चुंबकीय क्षेत्र स्थिर नहीं होता है। इसमें DC Current का  प्रयोग किया जाता हैं। 
विधुत धारा के चुंबकीय प्रभाव का खोज आस्टेड ने किया। 

किसी भी चुंबक में दो ध्रूव होते हैं-
North pole - यह धनात्मक होता हैं। 
South pole - यह ऋणात्मक होता हैं। 

यदि किसी चुंबक को n भागो में बाट दिया जाये तो पुनः ध्रुव का निर्माण हो जायगी। 
चुंबक का ध्रुव ठीक किनारे न होकर उसके कुछ अंदर होता हैं। 

➤चुंबकीय बल रेखाय-


जहाँ तक चुंबकीय बल को महसूस किया जाता है, उसे मिलाने वाली काल्पनिक  रेखा को चुंबकीय बल रेखा कहते है। 

चुंबक के बाहर यह उत्तर से दक्षिण की ओर जाती है, जबकि चुंबक के अंदर दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हैं। 

जहां चुंबक बल रेखाएं एक दूसरे के करीब होती है, वहां चुंबकीय क्षेत्र अधिक शक्तिशाली होती 

➤चुंबकीय फल्लस-

 चुंबकीय बल रेखाओ के प्रवाह को चुंबकीय फल्लस कहते हैं। 
इसका मात्रक वेवर होता है। 

➤लारेंज बल-


चुंबकीय फल्लस के प्रवाह से उतपन्न होने वाले बल को लारेंज बल कहते है। 

F = qVBsin𝚹 
जहां, q = आवेश, V = वेग, B = चुंबकीय क्षेत्र की तीवता, 𝚹 = कोण 

यदि कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर जायेगा तो 𝚹 शून्य हो जायगा और कोई बल नहीं लगेगा। 

जब आवेश लम्ब्वत जायेगा तो लारेंज बल अधिकतम लगेगा। 

नोट- चुंबकीय क्षेत्र का मात्रक टेसला होता है। इसका CGS मात्रक गौश होता है। 

10 ⁴ गौश = 1 टेसला 

किसी धारावाहिक चालक के कारण लगने वाला बल-
F = IBLSin𝚹 
जहां, I = धारा, B = चुंबकीय क्षेत्र, L = चालक की लम्बाई 

➤धारावाहिक चालक पर लगने वाले वाले बल की दिशा-

बल की दिशा ज्ञेयात करने के लिए फ्लेमिंग के वाये हाथ के नियम का प्रयोग करते है। 

इसके अनुसार यदि अंगूठा तर्जनी तथा मध्यमान उग्गली को इस प्रकार खोले की ये तीनो आपस में लंबवत हो तो अंगूठा बल को, तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र को तथा मध्यमान धारा को दर्शाता हैं। 
जबकि गोल चिन्ह बाहर की ओर चुंबकीय क्षेत्र को दर्शाता हैं। 

➤वायो और शावर्त का नियम-

किसी छोटे धारावाहिक चालक के टुकड़े के कारण उतपन्न होने वाला चुंबकीय क्षेत्र वायो और शावर्त का नियम कहलाता है। 




By Prashant

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