Click here for Biology ➤धारा का उष्मीय प्रभाव- 1) टंगस्टन- यह कम ऊष्मा तथा अधिक पकाश देता है। इसका प्रतिरोध तथा गलनांक दोनों ही उच्च रहता है। टंगस्टन का प्रयोग बल्ब तथा tubelight में करते है। बल्ब के फिलामेंट को गोल coil के रूप में लगाया जाता है। जिसे लम्बाई बढ़ जाता है, जिस कारण प्रतिरोध बढ़ जाता है। 2) नाइक्रोम- यह अधिक ऊष्मा तथा कम प्रकाश देता है। इसका प्रतिरोध तथा गलनांक दोनों ही उच्च होता है। इसका प्रयोग हीटर में करते है। 3) आयरन ( Iron)- इसका निचला भाग एस्वेस्टस का बना होता है, जिसके ऊपर अभ्र्क के चादर से ढकी हुई नाइक्रोम की तार होती है। अभ्र्क नाइक्रोम की ऊष्मा को एस्वेस्ट्स तक भेज देता है किन्तु धारा को नहीं भेजता है। Iron (प्रेस) का बाहरी भाग बैकेलाइट का बना होता है। ( Handle) 4) Tubelight/प्रतिदिव्पति नलिका - इसके दोनों सिरों पर टंगस्टन का तार होता है। जिसके आगे वेरियम पारा-ऑक्साइड की लेप लगी होती हैं। जब विधुत प्रवाहित किया जाता है तो टंगस्टन गर्म होता है और वह वेरियम पारा-ऑक्साइड से एलेक्ट्रॉन निकाल देता हैं। जब ये एलेक्ट्रॉन tu...
click here for Chemistry गति , दुरी और विस्थापन गति(Motion)- जब किसी वस्तु के स्थिति में समय के सापेक्ष परिवर्तन देखा जाता है तो उसे गति कहते है। दुरी(Distance)- दो बिंदुओं के बिच के लम्बाई को दुरी कहते है। यह एक अदिश राशि है। यह कभी भी शून्य नहीं हो सकती। इसका मात्रक मीटर तथा बिमा लम्बाई होता है। Note - जब कोई वस्तु वृतीय मार्ग पर गति करती है तो उसके द्वारा तैय की गई दुरी , d = 2𝛑 r n , जहां n चकरो की सखया है। विस्थापन(Displacement)- दो बिंदुओं के बिच के न्यूनतम दुरी को विस्थापन कहते है। यह सदिश राशि है। यह धनात्मक ,ऋणात्मक तथा शून्य हो सकता है। दुरी ≥ विस्थापन By Prashant
Click here for Biology ➤ समतल दर्पण से परावर्तन - रजत दर्पण बनाने में ग्लूकोज का प्रयोग होता हैं। दर्पण के पीछे कलई (पेंट) करने के लिए सिल्वर ब्रोमाइड का प्रयोग किया जाता है। → समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब की निम्लिखित विशेषता होती है - 1) प्रत्येक वस्तु से अनंत किरणे निकलती है किन्तु प्रतिबिम बनाने के लिए किसी दो किरण की आवश्यकता होती हैं। 2 ) प्रतिबिम्ब वहा बनता है जहा किरणे एक-दूसरे को कटती है या कटती हुई प्रतीत होती है। जहा किरणे वास्तव में कटती है वहा वास्तविक प्रतिबिंब बनता है और जहा काटती हुई प्रतीत होती है वहा आभासी प्रतिबिम्ब होती है। 3) समतल दर्पण से आभासी प्रतिबिम्ब ही बनते हैं। 4) समतल दर्पण में अपना पूरा प्रतिबिम्ब देखने के लिए अपनी लम्बाई के आधे लम्बाई का दर्पण लेना होता है। 5) यदि दर्पण को 𝝝 कोण पर धुमाया जाये तो तो प्रतिबिम्ब 2𝝝 कोण पर घूम जायगा। 6) यदि कोई व्यक्ति V वेग से दर्पण की ओर आ रहा है तो प्रतिबिम्ब 2V वेग से आता हुआ प्रतीत होगा। 7) वस्तु दर्पण से जितनी दूर रखी रहती है दर्पण के अंदर उतनी ही दुर...
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