Click here for Biology ➤ डोप्पलर प्रभाव (Doppler's effect)- यह प्रभाव ध्वनि तथा प्रकाश दोनों में देखा जाता हैं। मौसमी रडार डोप्पलर प्रभाव पर कार्य करता हैं। ➤ प्रकाश में डोप्पलर प्रभाव- प्रकाश में डोप्पलर प्रभाव को दर्शाने के लिए अवरक्त विस्थापन (इंफ़्रा-रे शिफ्टिंग) के सिद्धांत की मदद लेते हैं। इस नियम के अनुसार जब कोई तारा हमारे करीब आता है तो उसकी आवृति बढ़ती है जिस कारण उसका तरंगदैध्र्य घट जाता है, और वह बैगनी रंग की ओर विस्थापन हो जाती हैं। जब कोई तारा हम से दूर जाता है तो उसकी आवृति घटती है जिस कारण उसका तरंगदैध्र्य बढ़ जाता है अतः वह लाल रंग की और विस्थापित हो जाता हैं। ➤ ध्वनि में डोप्पलर प्रभाव- श्रोता तथा स्रोत के बिच जब आपेक्षी गति होता है तो उनकी आवृति भी घटती-बढ़ती महसूस होती है इसी घटना को ध्वनि का डोप्पलर प्रभाव कहते हैं। ➤ व्यतिकरण (Interference)- जब समान आवृति के दो तरंगे एक दूसरे पर अध्यारोपित (टकराती) होती है तो तरंगो की तीव्रता कहि बढ़ जाती है तो कही पर शून्य हो जाती है इसी घटना को व्यतिकरण कहते हैं। व्यक्...
Click here for Biology ➤धारा का उष्मीय प्रभाव- 1) टंगस्टन- यह कम ऊष्मा तथा अधिक पकाश देता है। इसका प्रतिरोध तथा गलनांक दोनों ही उच्च रहता है। टंगस्टन का प्रयोग बल्ब तथा tubelight में करते है। बल्ब के फिलामेंट को गोल coil के रूप में लगाया जाता है। जिसे लम्बाई बढ़ जाता है, जिस कारण प्रतिरोध बढ़ जाता है। 2) नाइक्रोम- यह अधिक ऊष्मा तथा कम प्रकाश देता है। इसका प्रतिरोध तथा गलनांक दोनों ही उच्च होता है। इसका प्रयोग हीटर में करते है। 3) आयरन ( Iron)- इसका निचला भाग एस्वेस्टस का बना होता है, जिसके ऊपर अभ्र्क के चादर से ढकी हुई नाइक्रोम की तार होती है। अभ्र्क नाइक्रोम की ऊष्मा को एस्वेस्ट्स तक भेज देता है किन्तु धारा को नहीं भेजता है। Iron (प्रेस) का बाहरी भाग बैकेलाइट का बना होता है। ( Handle) 4) Tubelight/प्रतिदिव्पति नलिका - इसके दोनों सिरों पर टंगस्टन का तार होता है। जिसके आगे वेरियम पारा-ऑक्साइड की लेप लगी होती हैं। जब विधुत प्रवाहित किया जाता है तो टंगस्टन गर्म होता है और वह वेरियम पारा-ऑक्साइड से एलेक्ट्रॉन निकाल देता हैं। जब ये एलेक्ट्रॉन tu...
Click here for Biology ➤ उत्तल दर्पण ( Convex mirror )- वह दर्पण जिसका परावर्तक पृष्ठ उठा हो उत्तल दर्पण कहलाता हैं। उत्तल दर्पण के सामने वस्तु कहि पर भी रखी हो तो प्रतिबिम्ब सदैव वस्तु से छोटा, आभासी, सीधा तथा दर्पण की ओर बनेगा। → उत्तल दर्पण की विषेशता - 1) यह किरणों को फैला देता है अतः अपसारी ( diversing ) होता है। 2) इसकी फोकस दुरी सदैव धनात्मक होता हैं। 3) यह प्रतिबिम्ब को सीधा तथा छोटा बनाता है। 4) यह बहुत बड़ी वस्तु को छोटा कर देता है जिस कारण इसका प्रयोग गाड़ियों के side-mirror के लिए करते हैं। 5) यह किरणों को फैलाता है जिस कारण इसका प्रयोग सड़क के किनारे भेपर लाइट के रूप में प्रयोग करते हैं। 6) सोडियम परावर्तक लैप में प्रयोग करते हैं। 7) इसकी आवर्धन क्षमता सदैव एक से कम रहता हैं। → आवर्धन ( Magnification )- प्रतिबिम्ब की लम्बाई तथा वस्तु की लम्बाई के अनुपात को आवर्धन कहते हैं। M = ー V ➗ U नोट- यहां V तथा U के आगे घनात्मक तथा ऋणात्मक चिन्ह दर्पण के अनुसार लगेगा। By Prashant
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