Click here for Biology ➤धारा का उष्मीय प्रभाव- 1) टंगस्टन- यह कम ऊष्मा तथा अधिक पकाश देता है। इसका प्रतिरोध तथा गलनांक दोनों ही उच्च रहता है। टंगस्टन का प्रयोग बल्ब तथा tubelight में करते है। बल्ब के फिलामेंट को गोल coil के रूप में लगाया जाता है। जिसे लम्बाई बढ़ जाता है, जिस कारण प्रतिरोध बढ़ जाता है। 2) नाइक्रोम- यह अधिक ऊष्मा तथा कम प्रकाश देता है। इसका प्रतिरोध तथा गलनांक दोनों ही उच्च होता है। इसका प्रयोग हीटर में करते है। 3) आयरन ( Iron)- इसका निचला भाग एस्वेस्टस का बना होता है, जिसके ऊपर अभ्र्क के चादर से ढकी हुई नाइक्रोम की तार होती है। अभ्र्क नाइक्रोम की ऊष्मा को एस्वेस्ट्स तक भेज देता है किन्तु धारा को नहीं भेजता है। Iron (प्रेस) का बाहरी भाग बैकेलाइट का बना होता है। ( Handle) 4) Tubelight/प्रतिदिव्पति नलिका - इसके दोनों सिरों पर टंगस्टन का तार होता है। जिसके आगे वेरियम पारा-ऑक्साइड की लेप लगी होती हैं। जब विधुत प्रवाहित किया जाता है तो टंगस्टन गर्म होता है और वह वेरियम पारा-ऑक्साइड से एलेक्ट्रॉन निकाल देता हैं। जब ये एलेक्ट्रॉन tu...
Click here for Biology ➤ प्रकाश का वर्ण विक्षेपण - जब स्वेत प्रकाश को प्रिज्म से गुजारा जाता है तो वह अपने सात अवयवी रंगो में बट जाती है। अपने मार्ग में सर्वाधिक बिचलित वैगनी रंग होती है अथार्त सर्वाधिक विखराव वैगनी रंग की होती है। ➤ प्रकीर्णन ( Scattering )- प्रकाश जब धूल-कण पर पड़ता है तो वह कई दिशाओ में विखर जाता है। इस घटना को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं। ➤ रैले का नियम- इनके अनुसार प्रकीर्णन, तरंगदैध्र्य के चतुर्थघाट के व्युत्क्रम के समानुपाती होता है। प्रकीर्णन ∝ 1 ➗ λ⁴ ➨लाल रंग का तरंगदैध्र्य अधिक होने के कारण उसका प्रकीर्णन सबसे कम होता है, जिस कारण इसका प्रयोग खतरे के संकेत के लिए करते है। ➨ चन्द्रमा से अंतरिक्ष यात्रियों को आसमान काला दिखेगा क्योकि वहा प्रकीर्णन नहीं होता है। ➨ प्रकीर्णन के कारण ही पृथ्वी तथा आसमान का रंग नीला दिकता है। ➨ प्रकीर्णन के कारण ही सूर्योदय एव सूर्यास्त के समय सूरज लाल रंग का दिखता है। ➨ कांच का चूर्ण प्रकाश को प्रकीर्णित कर देता है जिस कारण वह चमकीला दिखता है और उससे अपवर्तन नहीं हो पाता ...
Click here for Biology ➤विधुत क्षेत्र की त्रिवता - इकाई आवेश पर लगने वाले बिधुत बल को त्रिवता कहते है। E = F ➗Q ➤विभव ( Potential )- इकाई आवेश को विधुत क्षेत्र के अंदर लाने में किया गया कार्य विभव कहलाता है। V = W ➗ Q ➤विधुत द्विधुव - दो समान किन्तु प्राकृत में भिंन आवेश जब बहुत कम दुरी पर रखी दुरी पर रखे रहते है तो उसे द्विधुव कहते हैं। ➤द्वी-ध्रुव आगून - द्वि-धुव के एक आवेश तथा उनके बिच की दुरी के गुणनफल को द्विधुव आगून कहते है। P = Q ❌ 2l By Prashant
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