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about अर्द्धचालक/PN Junction/जेनर डायोड/निज अर्द्धचालक/Dopping/अशुद्ध अर्द्धचालक/N-type अर्द्धचालक/P-type अर्द्धचालक/Solid State/Trangister/Emitter/Colletor/from basic/physics-80

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  Click here for Biology ➤ अर्द्धचालक- वैसे पदार्थ जिसमे सिमित, मात्रा में धारा जाती है अर्द्धचालक कहलाती है।  अर्द्धचालक में धारा की उपत्ति कोटर/होल के कारण होती है।  कोटर धनात्मक होता है और जिस स्थान पर बनाता है वहां एलेक्ट्रोन की कमी हो जाती है जिसे भरने के लिए एलेक्ट्रोन प्रवाहित होने लगते है और धारा बहने लगती है।  तापमान बढ़ाने पर अर्द्धचालको का प्रतिरोध घट जाता है।  जिस अर्द्धचालक में कोटर की संख्या अधिक होती है उसे पॉजिटिव (+ve) P-type अर्द्धचालक कहते है।  जिस अर्द्धचालक में कोटर की संख्या कम होती है उसे N-type अर्द्धचालक कहते है।  ➤ PN Junction- जहाँ p-type तथा n-type के अर्द्धचालक आपस में मिलते है उसे PN Junction diode कहते है।  जर्मेनियम तथा सिलिकन सबसे प्रमुख अर्द्धचालक है किन्तु सिलिकॉन का प्रयोग अधिक किया जाता है।  सिलिकॉन को प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) बनाने में प्रयोग करते है जो मोबाइल तथा रेडियो में अधिक प्रयोग होता है।  PN Junction diode के भांति भी कार्य करता है।  ➤जेनर डायोड- समान्य डायोड Forward biase किन्तु जेनर ...

about प्रकाश विधुत प्रभाव/Threshold Frequency/देहली आवृति/Work Function/कार्य फलन/Diode/डायोड/ट्रायोड/प्रतिदीप्ति पदार्थ/स्फुरदीप्ति पदार्थ/from basic/physics-79

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Click here for Biology   ➤ प्रकाश विधुत प्रभाव-  प्रकाश द्वारा एलेक्ट्रोन उतपन्न कर के विधुत धारा उतपन्न करना प्रकाश विधुत प्रभाव कहलाता है।  आइस्टीन ने इसका सफल ब्यख्या किया था।  ➤Threshold Frequency( देहली आवृति )- वह न्यूनतम आवृति जो किसी धातु के सतह से एलेक्ट्रोन निकालने के लिए आवश्यक होती है उसे देहली आवृति कहते है।  ➤Work Function ( कार्य फलन )- किसी धातु की सतह से एलेक्ट्रोन को उतसर्जित कराने के लिए दी गई न्यूनतम ऊर्जा को कार्य फलन कहते हैं।  Max-Plank ने बताया की सूर्य से प्रकाश ऊर्जा के छोटे-छोटे पैकेट के रूप में आता है। प्रत्येक पैकेट को फोटॉन कहते हैं।  ➤Diode ( डायोड )- यह दो इलेक्ट्रोड के मिलाने से बनता है। यह तापमापी उतसर्जित के सिद्धांत पर कार्य करता है।  यह AC को DC में बदलने का कार्य करता है। अतः इसे दृष्ट्कारी ( Rectifier ) या त्रिजुकारी कहते है।  ➤ट्रायोड- जब डायोड के दो प्लेटो के बिच एक छृद युक्त प्लेट लगा देते है जिसे ग्रिड कहते है तो इस युक्ति को ट्रायोड कहा जाता है।  ट्रायोड की उपयोगिता डायोड से बहुत अधिक होती है। ...

about GATE/AND- gate/OR- gate/NOT- gate/NAND- gate/NOR- gate/from basic/physics-78

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  Click here for Biology ➤ GATE- यह छोटे धाराओं को प्रवाहित करने वाला एक सर्किट होता है।  यह बुलियन अलजेब्रा पर कार्य करता है।  1= on  0= off  1) AND- gate संकेत ↴ परिपथ ( Circuit)↴ यह तब ही output signal देने का कार्य करता है जब सभी कंजी on हो  2) OR- gate  परिपथ ↴ इस गेट में यदि एक भी Switch On है तो धारा प्रवाहित करेगी।  3) NOT- gate  यह Inverter gate कहलाता है। यह तब जलता है जब Switch Off रहता है।  ➤ NOT + OR = NOR       NOT + AND = NAND  यह यूनिवर्सल गेट है।  ➨NAND- gate  यह AND gate तथा NOT gate दोनों के मिलने से बनता है।  ➨NOR- gate  यह NOT gate तथा OR gate के मिलने से बनता है।  By Prashant

about nature of magnet/चुंबक की प्राकृति/प्रति-चुंबकीय/Dimagnetic/अणु-चुंबकीय/Paramagnetic/लौह-चुंबकीय/Ferromagnetic/क्यूरी ताप/Curi temp/पार्थिव चुंबक/भौगोलिक याम्योत्तर/चुंबकीय याम्योत्तर/from basic/physics-77

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  Click here for Biology ➤चुंबक की प्राकृति- चुंबकीय पदार्थ को तीन भाग में बाटते हैं- 1) प्रति-चुंबकीय ( Dimagnetic )- ये चुंबक के प्रति प्रतिकर्षण दर्शाने लगते है। अतः इनकी चुम्ब्शीलता ऋणात्मक होती है।  जैसे- सोना, चांदी, कॉपर, विस्मथ, हवा, जल, हाइड्रोजन आदि।  2) अणु-चुंबकीय (Paramagnetic)- ये चुंबक के प्रति कम आकर्षित होती है। इसकी चुंबकशीलता धनात्मक होती है।  जैसे- पोटैशियम, ऑक्सीजन, एल्युमिनियम, क्रोनियम, सोडियम, माँगनेसियम आदि।  3) लौह-चुंबकीय (Ferromagnetic)- ये चुंबक के प्रति अत्यधिक आकर्षित होते है। अतः इनकी चुंबकशीलता अत्यधिक धनात्मक होती है।  जैसे- लोहा, कोबाल्ट, निकल आदि।  ➤ट्रिक- जिस तत्व के अंत में "म'' लगा होता है वह सामान्यतः अणु-चुंबकीय होता है।  जैसे- सोडियम, मैग्नीशियम, एलुमिनियम, पोस्तासियम, क्रोनियम आदि।  ➤क्यूरी ताप (Curi temp.)- वह तापमान जिसके निचे कोई पदार्थ लौह चुंबकीय रहता है किन्तु उसके ऊपर वह अणु चुंबकीय हो जाता है।  अलग-अलग पदार्थ के लिए क्यूरी तापमान अलग-अलग होता है।  जैसे- लोहा= 973K, निकेल= 673K, कोबा...

about Magnet/चुंबक/चुंबकीय बल रेखाय/चुंबकीय फल्लस/लारेंज बल/धारावाहिक चालक पर लगने वाले वाले बल की दिशा/वायो और शावर्त का नियम/from basic/physics-76

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  Click here for Biology ➤ Magnet ( चुंबक )-   यह एक काले रंग का पदार्थ होता है, जिसमे आकर्षण तथा प्रतिकर्षण का गुण देखा जाता है। हालांकि चुंबक की असली पहचान प्रतिकर्षण से होता है। चुंबक लोहे का अयस्क  मैगनेटिक (Fe₃O₄) होता है।  चुंबक को दिशा सूचक या Load Stone भी कहते हैं। अस्थायी चुंबक को बनाने के लिए नर्म लोहा का प्रयोग करते है, जबकि स्थायी चुंबक के लिए स्टील ( इस्पात ) का प्रयोग करते है।  अस्थायी चुंबक में चुंबकीय क्षेत्र स्थिर नहीं होता है। इसमें DC Current का  प्रयोग किया जाता हैं।  विधुत धारा के चुंबकीय प्रभाव का खोज आस्टेड ने किया।  किसी भी चुंबक में दो ध्रूव होते हैं- North pole - यह धनात्मक होता हैं।  South pole - यह ऋणात्मक होता हैं।  यदि किसी चुंबक को n भागो में बाट दिया जाये तो पुनः ध्रुव का निर्माण हो जायगी।  चुंबक का ध्रुव ठीक किनारे न होकर उसके कुछ अंदर होता हैं।  ➤चुंबकीय बल रेखाय- जहाँ तक चुंबकीय बल को महसूस किया जाता है, उसे मिलाने वाली काल्पनिक  रेखा को चुंबकीय बल रेखा कहते है।  चुंबक के बाहर यह उत...

about Shell/सेल/प्राथमिक सेल का उदहारण/वोल्टीय सेल/डनियल सेल/लेकलाये सेल/शुष्क सेल/द्वितीयक सेल/आंतरिक प्रतिरोध/बैट्री/बैट्री का श्रेणी क्रम समायोजन/बैट्री का समानांतर क्रम समायोजन/from basic/physics-75

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  Click here for Biology ➤ Shell (सेल )- यह रसायनिक ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदलता है।  यह दो प्रकार का होता है-  1) प्राथमिक सेल    2) द्वितीयक सेल  ➤  प्राथमिक सेल का उदहारण- 1) वोल्टीय सेल- सर्वप्रथम इसे वोल्टा नामक विद्वान ने बनाया था और रसायनिक ऊर्जा से विधुत वाहक बल उतपन्न किया था।  इसमें इलेक्ट्रोलाइट (Liquid) के रूप में H₂SO₄ का उपयोग करते है तथा एनोड के लिए जस्ता (जिंक) तथा कैथोड के लिए ताम्बा का प्रयोग करते है। इसमें 1.08 V का Current उतपन्न होता है। यह आकार में बहुत बड़ा होने के कारण इसका समान्य प्रयोग नहीं किया जाता है।  2) डनियल सेल- इसमें कैथोड के रूप में ताम्बा का बेलनाकार प्लेट का उपयोग होता है। इसमें Electrolight ( Liquid ) के रूप में कॉपर सल्फेट का प्रयोग होता है। इसमें 1.1 V का इलेक्ट्रो मोटिभ फ़ोर्स उप्तन्न होता है।  3) लेकलाये सेल- इसमें इलेक्ट्रो-लाइट के रूप में अमोनिया क्लोराइड का उपयोग होता हैं।  कैथोड के रूप में कार्बन छड़ का तथा एनोड के रूप में जस्ता का प्रयोग होता है और विधुवक के रूप में MgO₂ का उपयोग होता है...

about Transfarmer/ट्रांसफार्मर /किसी ट्रांसफार्मर या स्टेप्लाइजर का कटऑफ Voltage/स्टेप्लाइजर/AC Current/प्रत्यावर्ती धारा/DC Current/दृष्टिकारी धारा from basic/physics-74

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  Click here for Biology ➤Transfarmer(ट्रांसफार्मर )- यह एक स्थैतिक युक्ति है। इसको बनाने के लिए नर्म लोहा का प्रयोग किया जाता है।  इसमें नेफ्रया ऑइल का प्रयोग होता है। यह अन्योँप प्रेरण ( Mutual Inducation ) के सिद्धांत पर कार्य करता है।  ट्रांसफार्मर केवल AC पर कार्य करता है। इसे DC से जोड़ने पर ट्रांसफार्मर जल जायगा।  ट्रांसफर्मर की दक्षता ( Rating ) किलो वोल्ट एम्पियर (KVA ) में मापते है जबकि इसके शक्ति को किलो वाट (KW ) में दर्शाते है।  कोई भी ट्रांसफर्मर 90 से 95 % ही दक्ष होता है। ट्रांसफर्मर शक्ति को स्थिर रखता है  P = ↑I V↓  ट्रांसफार्मर जब वोल्टेज बढ़ाएगा तो धारा घटा देता है। इसे Step-Up ट्रांसफार्मर कहते है। ट्रांसफार्मर जब वोल्टेज गिराता है तो धारा उठा देता है। इसे Step-Down ट्रांसफार्मर कहते है। ट्रांसफार्मर शक्ति तथा धारा के आवृति में कोई परिवर्तन नहीं लाता है।  जब ट्रांसफार्मर के द्वितीय कुंडली में फेरो की संख्या अधिक रहती है  वह Step-up के भांति कार्य करता है। जब ट्रांसफार्मर के द्वितीय कुंडली में फेरो की संख्या कम रहती है तो उस...